व्यापम घोटाले से जुड़े 40 लोगों की संदिग्ध हालात में मौत

नई दिल्ली (28 मई)। मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले में हुए एक बड़े खुलासे से पता चला है कि इस घोटाले की जांच के दौरान केस से जुड़े 40 लोगों की अब तक संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। ज्ञात रहे कि इन लोगों की मौत पिछले तीन साल में हुई है। घोटाले से जुड़े लोगों की इतनी बड़ी तादाद तथा संदिग्ध अवस्थाओं में हुई मौत के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या इनका सम्बन्ध इस घोटाले के सच को छुपाने को लेकर है? और क्या मामले से जुड़े लोगों की इतनी बड़ी तादाद मौतों के बाद क्या सच सामने आ पाएगा या नहीं!

सवाल ये भी हैं कि घोटाले से जुड़े लोगों की मौत स्वाभाविक हुई है या उनकी हत्या की गई है? हाई कोर्ट की तरफ से घोटाले की जांच के लिए बनाई गई SIT को पुलिस ने जांच की जो ताजा रिपोर्ट पेश की है उससे खुलासा हुआ है कि कि घोटाले से जुड़े 40 लोगों की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। मारे गए सभी लोगों की उम्र 25 से 30 साल के बीच थी और इनकी मौत 2012 में जांच शुरू होने के बाद संदिग्ध हालात में हुई। कहा जा रहा है कि इस खुलासे की बाद SIT मौत की वजहों की जांच करने को कहेगा।

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मारे गए लोगों में मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव के बेटे शैलेश, फार्मासिस्ट विजय सिंह और इंदौर मेडिकल कॉलेज की छात्रा नम्रता दामोर MPPEB घोटाले के अभियुक्त थे तथा मारे गए ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल क्षेत्र से आते थे। इनमें शैलेश की मौत जहर की वजह से हुई, और इस घोटाले के हाई प्रोफाइल संदिग्धों से जुड़े खास विजय सिंह के मौत के कारणों को न तो मध्य प्रदेश पुलिस ही और न छत्तीसगढ़ पुलिस अब तक कोई सुराग तलाश पाई है।

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