जज विवाद पर सहयोगियों ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की ओर से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलने पर अब भाजपा के सहयोगियों के साथ नाराज़ गुट भी सरकार को घेरने में जुट गए हैं। सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से नाराज चल रहे भाजपा के सीनियर लीडर यशवंत सिन्हा ने शनिवार को कहा कि जजों की तरह ही मोदी के मंत्रियों को भी लोकतंत्र के लिए भय से परे होकर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं और कैबिनेट में शामिल मंत्रियों को भी लोकतंत्र के लिए आवाज उठानी चाहिए।

यशवंत सिन्हा के साथ-साथ महाराष्ट्र में भाजपा सरकार में शामिल शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि कल जो कुछ भी हुआ, वह परेशान करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकती है, लेकिन हमें यह भी सोचना होगा कि उन्हें ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा। लोकतंत्र के सभी 4 स्तंभों को स्वंतत्रता के साथ खड़ा रहना चाहिए, यदि वे एक दूसरे में गिरते हैं तो यह ध्वस्त हो जाएगा।

यशवंत सिन्हा ने 4 जजों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा हालात इमर्जेंसी जैसे हो गए हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने संसद के सत्र की अवधि कम किए जाने को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। पत्रकारों से बात करते हुए सिन्हा ने कहा कि संसद के कामकाज से समझौता किया जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट का काम सही से नहीं चल पा रहा है तो लोकतंत्र खतरे में है। यशवंत सिन्हा ने आगे कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे सीनियर जज कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है तो हमें उसे गंभीरता से लेना चाहिए।

पार्टी से से नाराज़ चल रहे यशवंत सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र की चिंता करने वाले हर नागरिक को आवाज़ उठानी चाहिए। मैं पार्टी के नेताओं और कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्यों से भी कहूंगा कि वे अपनी आवाज बुलंद करें। मैं उनसे अपील करूंगा कि वे भय से निकलकर देश के हित में सोचें। हालांकि सिन्हा ने यह भी कहा कि इस मामले से शीर्ष अदालत को खुद ही निपटना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस है, उसी तरह कैबिनेट के सभी बराबर के साथियों के बीच प्रधानमंत्री प्रथम होता है।

ज्ञात रहे कि अटल बिहारी वाजयेपी सरकार के समय वित्त मंत्री रहे तथा अर्थशास्त्र के जानकार माने जाने वाले यशवंत सिन्हा अकसर मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों पर गंभीर सवाल उठाते रहे हैं तथा इन फैसलों को हिटलरशाही तथा अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाला बताते रहे हैं।

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