जेल जाएंगे दिल्ली में न्यूनतम मज़दूरी नहीं देने वाले

दिल्ली सरकार द्वारा कामगारों की न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आंशिक रूप से वापिस लेने के फैसले के अब बाद दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी नए सिरे से तय करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने बृहस्पतिवार को चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया। यह कमेटी अगले एक हफ्ते तक बाजार कीमतों का आकलन कर के एक रिपोर्ट तैयार करेगी। जिसके बाद अगले दो महीनों तक संबंधित हितधारक अपनी आपत्तियां व सुझाव दे सकेंगे और उसी के आधार पर सरकार न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी।

श्रम मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली सरकार 31 जनवरी से पहले मजदूरी दर की यह नई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर देगी। इस बीच सरकारी और निजी क्षेत्र के मजदूरों को पहले ही की तरह बढ़ी दरों से मजदूरी मिलती रहेगी।

गोपाल राय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद बृहस्पतिवार को श्रम विभाग की बैठक हुई है जिसमें चार सदस्यीय कमेटी के गठन का फैसला लिया गया। कमेटी अगले एक सप्ताह में भोजन और कपड़ों को ध्यान में रखकर बाजार दरों का आकलन करेगी और अपनी रिपोर्ट तैयार कर लेगी। उन्होंने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट 10 नवंबर को दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी, जिससे कि अगले दो महीने तक संबंधित लोग अपनी आपत्तियां या फिर सुझाव दे सकेंगे।

दिल्ली सरकार ने 35 सदस्यीय दिल्ली न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन करने का फैसला किया है। जिसमें 15 सदस्य ट्रेड यूनियन से, 15 बाजार और उद्योगों के प्रतिनिधि तथा पांच सदस्य विभाग से होंगे। गोपाल राय ने बताया कि 10 जनवरी तक मिले सुझावों व आपत्तियों के आधार पर मजदूरी सलाहकार बोर्ड न्यूनतम मजदूरी दरें तय करेगा तथा इसके बाद कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर सरकार उसे 31 जनवरी से पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी।

गोपाल राय ने बताया कि इस प्रोसेस के पूरा होने तक सरकारी और निजी क्षेत्र के मजूदरों को दिल्ली सरकार की तरफ से बढ़ाई गई दर पर मजदूरी मिलती रहेगी। दिल्ली सरकार ने अप्रशिक्षित मजदूरों के लिए मिनिमम वेतन 13,350 रुपये, अर्द्ध प्रशिक्षित के लिए 14,690 व प्रशिक्षित मजदूरों के लिए 16,182 तय किया हैं। उन्होंने बताया कि तीन बार का महंगाई भत्ता जुड़ जाने के कारण अब मजदूरों को क्रमश: 14,000, 15,400 व 16,962 रुपये का न्यूनतम वेतन मिलेगा। सभी तरह के नियोक्ताओं को नवंबर महीने से इसी दर पर वेतन देना होगा।

गोपाल राय के मुताबिक अभी तक न्यूनतम मजदूरी का उल्लंघन करने पर 500 रुपये तथा 6 महीने का जुर्माना लगता था। पर दिल्ली सरकार ने कानून को और भी सख्त बना दिया है, अभी न्यूनतम वेतन दरों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माने की राशि 50,000 रुपये व सजा तीन साल तक कर दी है।

उन्होंने बताया क्योंकि महीने के दस तारीख तक सभी कंपनियां अपने कर्मचारियों को वेतन दे देती है इसलिए इस कानून को लागू कराने के लिए सरकार 10 दिसंबर से स्पेशल टॉस्क फोर्स का गठन करेगी, जिसमें 10-12 टीमें मौके पर जाकर चेक करेंगी और कानून का पालन सुनिश्चित करवाएंगी। इसके साथ-साथ सरकार 10-30 नवंबर के बीच न्यूनतम मजदूरी कानून व उसके उल्लंघन पर होने वाली कार्रवाई के प्रति नियोक्ताओं व कर्मियों को जागरूक करने के लिए एक महाअभियान शुरू करने जा रही है। इसके साथ ही एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। दिल्ली सरकार की कोशिश करेगी कि हर हालत में कानून का पालन हो।

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